BK Murli today in Hindi

Prajapita Brahma Kumaris Ishwariya Vishwa Vidyalaya Daily Gyan Murli Om Shanti

Tuesday, 18 September 2018

September 18, 2018

‌BK murli today 19/09/2018 (Hindi) Brahma Kumaris Murli प्रातः मुरली Om Shanti.Shiv baba ke Mahavakya

BK Murli Today  19 September 2018 Hindi


19/09/2018 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
''मीठे बच्चे - तुम्हारे दर पर कोई भी आये उसे कुछ न कुछ ज्ञान धन देना हैपहले फॉर्म भराओ फिर दो बाप का परिचय दो''
प्रश्नः-
जादूगर बाप की जादूगरी कौन सी है?
उत्तर:-
जादूगर बाप की जादूगरी देखो - इतना ऊंचा बाप कहते हैं मैं तुम्हारी सेवा में आया हूँमैं तुम्हारा बच्चा भी बन जाता हूँ। तुम बच्चे जब मेरे पर बलि चढ़ो तो फिर मैं 21 जन्मों के लिए तुम्हारे पर बलि चढूँ। यह भी वन्डरफुल बातें हैं। बाप कितने प्यार से तुम्हें पढ़ाई पढ़ाते हैं। तुम्हारी सब मनोकामनायें पूरी करते हैं। तुमसे कोई भी फीस आदि नहीं लेते हैं। उन्हें कहा जाता है - राझू-रमज़बाज।
गीत:-
जो पिया के साथ है........ 
BK Murli Today  19 September 2018 Hindi


ओम् शान्ति।
पिया और वर्षा। जो पिया के साथ है उसके लिए बरसात है। किस प्रकार कीइसको ज्ञान वर्षा कहा जाता है। ज्ञान वर्षा कौन करते हैंज्ञान का सागर। अब यह गीत जिन्होंने गाया या बनाया वह तो कुछ नहीं जानते। तुम हो लक्की ज्ञान सितारे। तुम ज्ञान सागर के बच्चे बने हो इसलिए तुमको ज्ञान सितारे कहा जाता है। बाप से ज्ञान ले रहे हो। नॉलेज की हमेशा एम-ऑब्जेक्ट होती है। कुछ न कुछ प्राप्ति का रास्ता मिलता है। अब तुम बच्चे जानते हो बेहद के बाप द्वारा बेहद का वर्सा लेना है। वह है पारलौकिक बाप। तुम्हारे पास कभी कोई नये जिज्ञासू आते हैं तो फॉर्म भरने से डरते हैं। तो उनको समझाना चाहिए क्योंकि फिर भी तुम्हारे पास आये हैं तो कुछ न कुछ बिचारों को मिलना चाहिए। बहुत गरीब हैं। तुम्हारे पास तो अथॉरिटी है। हाँनम्बरवार कोई फुल पास होते हैं,कोई कम। यह तो नशा है हमारे पास ज्ञान रत्न ढेर हैं। ज्ञान सागर कोई महल में तो नहीं रहते हैं,झोपड़ी में रहते हैं। झोपड़ी में रहना पसन्द करते हैं। जब कोई कहे हम फॉर्म नहीं भरेंगे तो बोलो - अच्छाअपना नाम तो लिखेंगेहम बड़ी बहन जी को दिखायें कि फलाना आया है। कुछ समझने के लिए तो आये हो। अच्छाअपना नाम लिखो। लौकिक फादर का भी नाम लिखना पड़े फिर समझाना है - दो बाप तो हैं। एक है लौकिक बाप,दूसरा है पारलौकिक परमपिता परमात्मा। जब पिता कहते हो तो उनका नाम तो लिखो। परमपिता कहते हो तो वह सबका बाप है। हर एक को लौकिक और पारलौकिक बाप होते हैं। भक्ति मार्ग में दोनों बाप हैं। सतयुग-त्रेता में लौकिक फादर तो हैपारलौकिक का नाम भी नहीं लेंगे। यह बातें तुम बच्चों को समझकर फिर समझाना है। कितनी सहज बातें समझाई जाती हैं। जिसको गॉड फादर कहा जाता है - वह है परलोक में रहने वाला। बुद्धि में आता है - बरोबर,सतयुग-त्रेता में पारलौकिक बाप को याद नहीं करते। यहाँ तो सब याद करते हैं। तो समझाना है लौकिक फादर का नाम लिखाअब पारलौकिक फादर का नाम लिखो। सब जीव की आत्मायें उस पारलौकिक परमपिता को याद करती हैं। वह एक ही है। जैसे आत्मा निराकार हैवैसे वह भी निराकार है। उनका तो कोई सूक्ष्म वा स्थूल शरीर नहीं है। उनको सर्वव्यापी तो कह नहीं सकते। लौकिक बाप को कभी सर्वव्यापी नहीं कह सकते हैं। क्या सर्वव्यापी कहने से वर्सा मिल सकता है?फिर पारलौकिक बाप को सर्वव्यापी क्यों कहते होपारलौकिक बाप को सब इतना याद करते हैं तो जरूर उनसे भी वर्सा मिलना चाहिए। रचना को रचता से वर्सा तो चाहिए ना। ऐसे नई-नई बातें समझाने से झट समझ जायेंगे। तुम अनुभव से बतलाते हो उस बाप से वर्सा पाने की युक्ति बताई जाती है। वह बाप है स्वर्ग का रचयिता। तुम जानते हो भारत जीवनमुक्त थाअब जीवनबंध है। दु:ख से लिबरेट करने वाला बाप ही है।

यह त्रिमूर्ति सहित लक्ष्मी-नारायण का चित्र बहुत अच्छा है। हर एक के पास होना चाहिए। इस पर समझाओ कि बरोबर यह लक्ष्मी-नारायण भारत के आदि सनातन देवी-देवता थेसतयुग के मालिक थे। स्वर्ग का वर्सा जरूर पारलौकिक बाप स्वर्ग का रचयिता ही दे सकते हैं। कोई फॉर्म न भी भरे लेकिन यह बात लिखाना तो सहज है। दो बाप हैंदोनों से वर्सा मिलता है। लक्ष्मी-नारायण अथवा उनके बच्चों आदि की जीवन कहानी तो है नहीं। कृष्ण के लिए कहते हैं उनको टोकरी में ले गयेयह हुआ। अच्छाइन लक्ष्मी-नारायण को राज्य कहाँ से मिलाबरोबर आदि सनातन देवी-देवताओं का राज्य थाइनमें पहला नम्बर लक्ष्मी-नारायण हैं। उन्हों को यह स्वर्ग का वर्सा किसने दियायह प्रजापिता ब्रह्मा भी बैठा हैयह वर्सा लक्ष्मी-नारायण सामने खड़े हैं। फिर झाड़ पर ले आओ। यहाँ तपस्या कर रहे हैं - राजयोग की। इनसे यह लक्ष्मी-नारायण बनते हैं। यह समझाना कितना सहज है। लक्ष्मी-नारायण के भक्तों को समझाना बहुत सहज है। अब अन्दर कोई आते हैं तो कुछ न कुछ शिक्षा जरूर देनी पड़े। तुम्हारे द्वारा इन वेश्याओंभीलनियों आदि का भी उद्धार होना है। परन्तु तुम्हारे में अभी वह ताकत नहीं है। बाबा ने समझाया है तुम अपने पति को भी भूं भूं करती रहो। स्त्री अपने पति से भी पूछ सकती है - तुम अपने लौकिक बाप का नाम बताओ। अच्छा,पारलौकिक बाप का नाम बताओजिसको तुम घड़ी-घड़ी जन्म बाई जन्म याद करते होजरूर उनसे कुछ जास्ती मिलता है। लक्ष्मी-नारायण को याद करने से तो कुछ मिलता नहीं है।

बाप आकर तुम्हारी कितनी सेवा करते हैं। बिगर मांगे तुमको पढ़ाते हैं। कहते हैं - आओतुमको स्वर्ग में ले चलें। सभी मनोकामनायें पूर्ण करते हैं। नर-नारायण का भी चित्र है ना। पूजा लक्ष्मी की होती है। समझते हैं लक्ष्मी से सम्पत्ति मिलेगी। यह सब भक्ति मार्ग की बातें हैं। लक्ष्मी (स्त्री) धन कहाँ से लायेगीउनको जरूर पति से मिलता है। पुजारी लोग यह कुछ भी नहीं जानते। तुम बच्चों को समझाना पड़े। तुम भी अभी समझते हो -आगे हम क्या करते थेकुछ भी नहीं समझते थे। अब अच्छी रीति जान गये हैं। कृष्ण-जन्माष्टमी होती है तो सवेरे में उनको दूध पिलाते हैंझूला झुलाते हैं और रात को फिर पूरी-तस्मई (खीर) आदि खिलाते हैं। क्या इतने में इतना बड़ा हो गयाजो पूरी तस्मई खाने लायक हो गया! यह भी समझने की बातें हैं ना। तुम जानते हो यह राधे-कृष्ण ही फिर लक्ष्मी-नारायण बनते हैं। शिवबाबा इन्हों को यह पद दिलाते हैं। शिव को कभी पूरी-तस्मई आदि नहीं खिलाते। उन पर सिर्फ दूध चढ़ाते हैं। अब शिवबाबा तो है निराकारजिसका कोई नाम-रूप नहींउन पर दूध आदि चढ़ाने का मतलब क्या हैउनको कुछ खिलाते नहीं हैं। निराकार है नाश्रीकृष्ण को रोटी आदि खाने के लिये मुख है। शिव पर कुछ नहीं चढ़ाते। शंकर पर चढ़ाते हैंशिव पर नहीं। शंकर का तो फिर भी आकार रूप है ना। दोनों एक तो हो नहीं सकते। अब बाबा कितनी नॉलेज देते हैं। कितनी गुप्त बातें हैं।

तुम गोपिकायें शिवबाबा की हो। शिव को फिर बालक भी कहते हैं। यह भी शिवबाबा पूछते हैं तुमने शिव को बालक क्यों बनाया हैवर्सा बालक को दिया जाता है। पहले जब तुम बलि चढ़ो तब ही शिवबाबा बलि चढ़े। यह भी है बाप बच्चों पर बलि चढ़ते हैं परन्तु कहते हैं पहले तुमको बलि चढ़ना हैतब मैं चढूँ। बलि चढ़ना अर्थात् उनको अपना बच्चा बनानाउनकी पालना करना। कितनी वन्डरफुल बातें हैं! मातायें हैं ना। पुरुष भी शिव बालक को अपना वारिस बनाते हैं। शिवबाबा को जादूगर कहते हैं ना। लक्ष्मी-नारायण जादूगर नहीं हैं। यह बड़ी गुप्त बातें हैं। विरला कोई समझ सकते हैं। अपरोक्ष भी बतलाते हैं। तुम बच्चे अनुभवी हो बाबा ने साक्षात्कार कियामम्मा ने कोई साक्षात्कार नहीं किया फिर भी मम्मा सबसे तीखी गई। सबको तो साक्षात्कार नहीं होगा। ऐसे तो बहुतों को साक्षात्कार हुए,आज हैं नहीं। साक्षात्कार से कोई कनेक्शन नहीं है। यह तो हैं धारण करने और कराने की मीठी बातें। जादूगर राझू रमज़बाज तो है ना। जादूगर लोग बहुत तीखे-तीखे होते हैं। संतरे निकाल दिखाते हैंसिर काटकर फिर जोड़ देते हैं। आगे बहुत जादूगरी दिखाते थे।

अब बच्चे जान गये हैं बाबा की ही महिमा गाई जाती है। तुम्हारी लीला अपरम-अपार हैतुम्हारी गति मत न्यारी है। बाप कितनी श्रीमत देते हैं। श्रीमत से तुमको श्रेष्ठ देवता बना रहे हैं। श्री श्री कहा जाता है निराकार शिवबाबा को। लक्ष्मी-नारायण को ऐसा श्रेष्ठ किसने बनायाजरूर उनसे श्रेष्ठ ते श्रेष्ठ होगा। बाबा से हम यह इलम (विद्या) सीखते हैं कि मनुष्य को देवता कैसे बनाया जाए। अभी तुम सब सीतायें रावण की जेल मेंशोक वाटिका में दु:ख उठा रही हो। रामराज्य में कभी शोक होता ही नहीं। तो जिससे वर्सा मिलता है उनको याद करना है ना। हम आत्मा हैं यह भी मानते हैं। पूछो तुम्हारे लौकिक बाप का नाम क्या हैपारलौकिक बाप का नाम क्या हैबाप को सर्वव्यापी तो नहीं कहेंगे। बाप माना वर्सा। बेहद के बाप से बेहद का वर्सा मिलता है। अब वह रावण ने छीना हुआ है इसलिए कहा जाता है माया जीते जगत जीत। माया पर जीत पानी है। मन तो तूफानी घोड़ा है। खूब पछाड़ने की कोशिश करेगा। बाबा ने अब तुम्हारी बुद्धि का ताला खोल दिया है। तुम राइट और रांग को समझ सकते हो। तुम समझा सकते हो अब यह दुनिया बदल रही है। महाभारी लड़ाई तो जरूर लगनी हैउसमें सब विनाश होंगे। यादव मूसलों से अपने ही यादव कुल का विनाश करते हैं। पाण्डव कुल की जीत होनी है। परन्तु दिखाया है 5पाण्डव बचेवह भी पहाडों पर गल मरे। बाकी क्या हुआकुछ नहीं। राजयोग सिखाया तो कुछ तो बचे होंगे। प्रलय थोड़ेही हो जाती है। यह सब बातें तुम अभी जानते हो। दिखाते हैं कृष्ण सागर में पत्ते पर आया। श्रीकृष्ण तो गर्भ महल में आते हैं। गर्भ जेल में दु:ख होता है। सागर तो गर्भ महल है। बड़े आराम से बैठा रहता है। जन्म-जन्मान्तर से यह गीता का ज्ञान भागवत आदि सुनते आये,भक्ति मार्ग के धक्के खाते आयेअभी बाप तुमको एक सेकेण्ड में स्वर्ग का मालिक बनाते हैं। इसको भावी कहते हैंपरन्तु भावी किसकीभावी ड्रामा की कहेंगे। बना-बनाया ड्रामा है ना। मनुष्य तो सिर्फ भावी कहते रहते हैंसमझते कुछ भी नहीं। तो जब कोई आये पहले-पहले यह बताओ कि दो बाप हैं। पारलौकिक बाप स्वर्ग का रचयिता है। उसने तो स्वर्ग का वर्सा दिया था। आज से 5हजार वर्ष पहले स्वर्ग था। अभी तो नर्क है फिर तुम वर्सा ले सकते हो। हम भी बेहद के बाप से वर्सा ले रहे हैं। यह भारत भगवान् की जन्म भूमि है। जैसे इब्राहमबुद्ध आदि की अपनी जन्म भूमि है। तुम बच्चे जानते हो बाप आये हुए हैंवर्सा दे रहे हैं। तुम बच्चों को रहमदिल बनना है। कोई को भी यह समझाना तो बहुत सहज है। पारलौकिक बाप की पहचान देनी है। पारलौकिक फादर एक ही बार आते हैं। उनकी याद से हम स्वर्ग का वर्सा ले रहे हैं। बहुत सहज है। ऐसी-ऐसी बातें अच्छी रीति धारण करो और समझाओ। दान करो। पारलौकिक बाप स्वर्ग की राजाई देते हैं। लक्ष्मी-नारायण को दी है ना। इस सूर्यवंशी लक्ष्मी-नारायण का बाप कौन हैहम आपको बताते हैं,स्वर्ग की स्थापना करने वाला फादर अब उन्हों को स्वर्ग की राजाई दे रहे हैं। बाकी आशीर्वाद क्या करेंगे। अच्छा!

मीठे-मीठे सिकीलधे लक्की ज्ञान सितारों प्रति मात-पिता बापदादा का नम्बरवार पुरुषार्थ अनुसार याद-प्यार और गुडमॉर्निंग। रूहानी बाप की रूहानी बच्चों को नमस्ते।
धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) राइट और रांग को समझ बुद्धि बल से मन रूपी तूफानी घोड़े को वश करके मायाजीत,जगतजीत बनना है। हार नहीं खानी है।
2) शिव को बालक बनाकर उनकी पालना करनी है अर्थात् पहले उन्हें अपना वारिस बनाना है। उन पर पूरा बलि चढ़ना है।
वरदान:-
''छोड़ो तो छूटो'' इस पाठ द्वारा नम्बरवन लेने वाले उड़ता पंछी भव
उड़ता पछी बनने के लिए यह पाठ पक्का करो कि ''छोड़ो तो छूटो''। किसी भी प्रकार की डाली को अपने बुद्धि रूपी पांव से पकड़कर नहीं बैठना। इसी पाठ से ब्रह्मा बाप नम्बरवन बने। यह नहीं सोचा कि साथी मुझे छोड़े तो छूटूंसम्बन्धी छोड़ें तो छूटूं। विघ्न डालने वाले विघ्न डालने से छोड़ें तो छूटूं-स्वयं को सदा यही पाठ प्रैक्टिकल में पढ़ाया कि स्वयं छोड़ो तो छूटो। तो नम्बरवन में आने के लिए ऐसे फालो फादर करो।
स्लोगन:-
जिनके संकल्पों में एक बाबा है उनकी मन्सा सदा शक्तिशाली है।
September 18, 2018

‌BK murli today 19/09/2018 (English) Brahma Kumaris Murli प्रातः मुरली Om Shanti.Shiv baba ke Mahavakya

BK Murli Today  19 September 2018 English


19/09/2018 Morning Murli Om Shanti BapDada Madhuban

Sweet children, give even a little wealth of knowledge to whoever comes to your door. First of all, ask them to fill in a form and then give the introduction of the two fathers.
Question:
What is the magic of the Father, the Magician?
Answer:
Look at the magic of the Magician Father! Such an elevated Father says: I have come to serve you. I also become your Child. When you children surrender yourselves to Me, I surrender Myself to you for 21 births. These are wonderful things. The Father teaches you with so much love. He fulfils all your desires. He doesn't even take any fees etc. from you. He is called the clever Entertainer.
Song:
The rain of knowledge is for those who are with the Beloved. 
BK Murli Today  19 September 2018 English 

Om Shanti
The Beloved and the rain: the rain is for those who are with the Beloved. What type of rain? This is called the rain of knowledge. Who showers the rain of knowledge? The Ocean of Knowledge. Those who sang and composed this song don't know anything. You are the lucky stars of knowledge. You have become children of the Ocean of Knowledge and this is why you are called stars of knowledge. You are receiving knowledge from the Father. Knowledge always has an aim and objective; you find the path to one attainment or another. You children know that you now have to claim your unlimited inheritance from the unlimited Father. He is the parlokik Father ( the Father from beyond). Sometimes when new students come to you, they are afraid to fill in a form. Therefore, you should explain to them. Since they have come to you, they should at least receive a little something from you. They are very poor, whereas you have authority. Yes, it is numberwise: some pass fully and others pass to a lesser degree. You have the intoxication of having plenty of jewels of knowledge. The Ocean of Knowledge doesn't reside in a palace; He resides in a hut. He prefers to reside in a hut. If any of them say that they will not fill in a form, tell them: OK, just write your name so that we can show our senior sister that so-and-so came. You have come here to understand something; OK, write down your name. They also have to write down the name of their lokik (physical) father and you can then explain that they have two fathers. One is a lokik father and the other is the parlokik Father, the Supreme Father, the Supreme Soul. You speak of the Father, so at least write down His name. Since you call Him the Supreme Father, He must be the Father of all. Each one has a lokik and parlokik Father. On the path of devotion, there are both fathers. In the golden and silver ages you have a lokik father, but the name of the parlokik Father is not even mentioned. You children have to understand these things and then explain them to others. These matters that are explained to you are so easy. The One who is called God, the Father, is the One who resides in the world beyond. It enters your intellects that you really don't remember your parlokik Father in the golden and silver ages. Here, everyone remembers Him. Therefore, you have to explain: You have written down the name of your lokik father, now write down the name of your parlokik Father. All living, embodied souls remember that Supreme Father, the Supreme Soul. He is the only One. Just as souls are incorporeal, similarly, He is incorporeal; He doesn't have a subtle or a physical body. He cannot be called omnipresent. You can never say that your lokik father is omnipresent. Is it possible to receive an inheritance when you call him omnipresent? Then, why do you say that the parlokik Father is omnipresent? Everyone remembers the parlokik Father so much. Surely, the inheritance should therefore be received from Him. The creation also needs to receive the inheritance from the Creator. When you explain such new things, they will quickly understand. You can tell them from your experience: We are showing you the way to claim your inheritance from that Father. That Father is the Creator of heaven. You know that Bharat was liberated-in-life and that it is now in a life of bondage. Only the Father can liberate you from sorrow. This picture of Lakshmi and Narayan with the Trimurti is very good. Everyone should have one of these pictures. Explain using this picture: Truly, Lakshmi and Narayan were the original, eternal deities of Bharat; they were the masters of the golden age. It would definitely be the parlokik Father, the Creator of Heaven, who can give you the inheritance of heaven. Even if some don't fill in a form, it is easy to make them write this down: You have two fathers and you receive an inheritance from both of them. There isn’t a life story of Lakshmi and Narayan or their children. They say of Krishna that he was carried away in a basket and that this happened… OK, from whom did Lakshmi and Narayan receive their kingdom? It truly was the kingdom of the original eternal deities and the first number in that were Lakshmi and Narayan. Who gave them that inheritance of heaven? This Prajapita Brahma is sitting here, and this inheritance, Lakshmi and Narayan, are just standing in front of you. Then, take them to the picture of the tree. Here, they are performing Raja Yoga. This is how they become Lakshmi and Narayan. It is so easy to explain this. It is very easy to explain to the devotees of Lakshmi and Narayan. When anyone comes inside, you definitely have to give him some teachings. Even those prostitutes and the natives have to be uplifted through you. However, you don’t have that power as yet. Baba has explained: You can also continue to buzz knowledge to your husbands. A wife can ask her husband: Tell me the name of your lokik father. OK, what is the name of the parlokik Father whom you repeatedly remember for birth after birth? You must surely receive something more from Him; you don't receive anything by remembering Lakshmi and Narayan. The Father comes and serves you so much. He teaches you without your asking Him to do so. He says: Come and I will take you to heaven. He fulfils all your desires. There is also the image of the ordinary man who becomes Narayan. It is Lakshmi who is worshipped. They believe that they will receive wealth from Lakshmi. All of those things belong to the path of devotion. Where would Lakshmi (the wife) bring wealth from? She definitely receives it from her husband. The priests in the temples don't know any of this. You children have to explain to them. You now understand what you used to do previously. You too didn't understand anything at that time. You now know this very well. In the morning of Krishna Janamashtami they offer milk to him and rock him in a cradle. Then, at night, they feed him puris and rice pudding. Did he become so big in one day that he was able to eat puris and rice pudding? This too is something to be understood. You know that it is Radhe and Krishna who then become Lakshmi and Narayan. Shiv Baba gives them that status. They never offer puris and rice pudding to Shiva; they simply pour milk over His image. Shiv Baba is incorporeal, so He doesn't have any name or form. What is the meaning of pouring milk over Him etc? They don't feed Him anything. He is incorporeal, whereas Shri Krishna has a mouth and is able to eat chapattis etc. They don't offer anything to Shiva. They offer things to Shankar, but not to Shiva. Shankar at least has a subtle form. The two cannot be the same. Baba is now giving you so much knowledge. These are such incognito matters. You are Shiv Baba's gopikas. Shiva is also called the Child. Shiv Baba asks you: Why have you made Shiv Baba your Child? An inheritance is given to a child. When you surrender yourself to Him first, Shiv Baba will then surrender to you. It is true that the Father surrenders Himself to the children, but He still says: When you surrender yourselves first, I will then surrender Myself to you. To surrender to Him means to make Him your Child and sustain Him. These are such wonderful matters! There are the mothers, but even the men make Shiv Baba the Child, their Heir. Shiv Baba is called the Magician. Lakshmi and Narayan are not magicians. These are very incognito matters. Hardly anyone can understand them. You are shown all of these things without visions. You children are experienced. Baba had visions, but Mama didn't have any visions and yet Mama went ahead of everyone. Not everyone will have visions. Many did have visions, but they are no longer here today. There is no connection with visions. These are the sweet things that you have to imbibe and inspire others to imbibe. He is the Magician and the clever Entertainer. Magicians are very clever. They make tangerines emerge from nowhere and they cut off someone's head and put it back on again. Previously, they used to show a lot of magic. You children now know that this is only Baba’s praise: “Your divine activities are limitless! Your ways and means are unique!” The Father gives you so much shrimat (elevated directions). He is making you into elevated deities with shrimat. Incorporeal Shiv Baba is called Shri Shri. Who made Lakshmi and Narayan so elevated? It must definitely have been someone who was more elevated than them. We are learning from Baba the knowledge of how human beings can be made into deities. All of you Sitas are now experiencing sorrow in Ravan’s jail in the cottage of sorrow. There is never any sorrow in the kingdom of Rama. Therefore, you have to remember the One from whom you receive the inheritance. They also believe that they are souls. Ask them: What is the name of your lokik father? What is the name of your parlokik Father? The Father cannot be called omnipresent. The Father means the inheritance. You receive the unlimited inheritance from the unlimited Father. Ravan snatched that away from you. This is why it is said: Those who conquer Maya conquer the world. You have to conquer Maya. The mind is a wild horse; it will try very hard to make you fall. Baba has now opened the locks on your intellects. You can now understand right and wrong. You can explain that this world is now changing. The great war is definitely going to take place and everyone will be destroyed in that. The Yadavas destroy their own clan with the missiles that they themselves create. The Pandava clan is to be victorious. However, they have shown that only five Pandavas were saved, but that they melted away on the mountains. What happened to the rest of them? Nothing at all. Since He taught Raja Yoga, some must have been saved. Annihilation doesn't take place. You now know all of these things. They show Krishna coming on a pipal leaf floating in the ocean. Shri Krishna comes from the palace of a womb. There is sorrow in the jail of a womb. The ocean is the palace of a womb. He is sitting very comfortably. For birth after birth you have been listening to this knowledge of the Gita, the Bhagawad etc. and stumbling around on the path of devotion. The Father now makes you into the masters of heaven in a second. This is called destiny, but destiny of what? It would be called the destiny of the drama; it is the predestined drama. People simply say that it is destiny, but they don't understand anything. So, when anyone comes, first of all tell him that he has two fathers. The parlokik Father is the Creator of heaven. He gave you the inheritance of heaven. It became heaven exactly 5000 years ago. It is now hell and you can claim your inheritance once again. We are also claiming our inheritance from the unlimited Father. Just as Abraham and Buddha etc. have their own birthplace, so this Bharat is the birthplace of God. You children know that the Father has come and is giving you the inheritance. You children have to become merciful. It is very easy to explain this to anyone. You have to give them the introduction of the parlokik Father. The parlokik Father only comes once. We are claiming the inheritance of heaven by having remembrance of Him. It is very easy. Imbibe such things very well and explain them to others; donate them. The parlokik Father gives the kingdom of heaven. Lakshmi and Narayan were given this. Who is the father of the sun-dynasty Lakshmi and Narayan? We are telling you that the Father who established heaven is now giving them the kingdom of heaven. What blessings would He give? Achcha.

To the sweetest, beloved, lucky stars of knowledge, to the long-lost and now-found children, numberwise, according to the effort you make, love, remembrance and good morning from the Mother, the Father, BapDada. The spiritual Father says namaste to the spiritual children.
Essence for Dharna:
1. Understand right and wrong and control the wild horse of your mind with the power of your intellect and become a conqueror of Maya and a conqueror of the world. Don't be defeated.
2. Make Shiva your Child and sustain Him, that is, first of all make Him your Heir. Surrender yourself to Him fully.
Blessing:
May you be a flying bird and claim number one with the lesson of, “Let go and become free”.
In order to become a flying bird, make the lesson firm, “Let go and become free”. Do not hold onto any type of branch with the foot of your intellect and sit on it. Father Brahma became number one with this lesson. He never thought that he would become free when his companions free him or when his relatives made him free, when those who create obstacles stop creating obstacles he can be free - He always taught himself the lesson, “Let go and become free” in a practical way. So, in order to become number one, follow the father in the same way.
Slogan:
The minds of those who have the one Baba in their intellects are always powerful.

Monday, 17 September 2018

September 17, 2018

‌BK murli today 18/09/2018 (Hindi) Brahma Kumaris Murli प्रातः मुरली Om Shanti.Shiv baba ke Mahavakya

BK Murli Today  18 September 2018 Hindi


18/09/2018 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन

''मीठे बच्चे - आत्मा और परमात्मा का यथार्थ ज्ञान तुम्हारे पास है, इसलिए तुम्हें ललकार करनी है, तुम हो शिव शक्तियां''
प्रश्नः-
सबसे ऊंची मंज़िल कौन सी है, जिसका ही तुम बच्चे पुरुषार्थ कर रहे हो?
उत्तर:-
निरन्तर याद में रहना - यह है सबसे ऊंची मंजिल। याद से ही कर्मभोग चुक्तू हो कर्मातीत अवस्था होगी। जिस मात-पिता से अपार सुख मिल रहे हैं, उनके लिये बच्चे कहते - बाबा, आपकी याद भूल जाती है! वन्डर है ना। देही-अभिमानी रहने का पुरुषार्थ चलता रहे तो याद भूल नहीं सकती।
गीत:-
किसने यह सब खेल रचाया.......
BK Murli Today  18 September 2018 Hindi


ओम् शान्ति।
भगवानुवाच - बच्चे अपने बाप भगवान् को जानते हैं। अभी बच्चे आकरके बाप द्वारा आस्तिक बने हैं, क्योंकि बाप द्वारा बाप को जाना है इसलिए आस्तिक कहलाते हैं। तुमने जाना है बरोबर हम आत्मा हैं, वह हम आत्माओं का बाप है। भल कोई मनुष्य अपने को आत्मा समझते भी हों परन्तु परमात्मा को कोई नहीं जानते। जब बाप खुद आकर बच्चे पैदा करे और उनको अपना परिचय दे, तब जानें। बाप को ही अपना परिचय देना है। वह है आत्माओं का फादर। सम्मुख आकर बतलाते हैं कि तुम आत्मायें हो, मैं तुम आत्माओं का परमपिता हूँ। तुम निश्चय करते हो। यह तो कॉमन बात है। आत्माओं का बाप जरूर है। गायन भी है आत्मा और परमात्मा अलग रहे बहुकाल.......। बाप को बच्चे ही जानते हैं। बाप 5 हजार वर्ष बाद फिर आये हुए हैं। जब सब बच्चे नास्तिक दु:खी बन जाते हैं, एक भी आस्तिक नहीं रहता है तब बाप आते हैं। आस्तिक बनाकर फिर छिप जाते हैं। फिर कोई भी बाप को जानते नहीं। अब तुम बच्चों में यह निश्चय नम्बरवार पुरुषार्थ अनुसार है। सबको पूरा निश्चय नहीं है। भल यहाँ सम्मुख बैठे हैं, जानते हैं परमपिता परमात्मा, पतित-पावन बाप पतित से पावन देवता बना रहे हैं। देवताओं की तो यहाँ सिर्फ मूर्तियां हैं। खुद तो हैं नहीं। जो भी मनुष्य मात्र हैं, सिवाए तुम ब्राह्मणों के, और कोई भी आत्मा और परमात्मा को नहीं जानते। हम सो परमात्मा कह देने से न आत्मा को, न परमात्मा को जानते। तुम बच्चे जानते हो कि एक भी मनुष्य नहीं जो अपने को यथार्थ रीति आत्मा समझ और परमात्मा को अपना बाप समझें। लेकिन अब यह ललकार कौन करें? शक्तियों ने ही ललकार की थी। परन्तु अभी तक वह शक्ति आई नहीं है जो तुम्हारे में आनी चाहिए। शिव शक्तियां तो मशहूर हैं, नामीग्रामी हैं। जगत अम्बा भी शक्ति है। अब कॉन्फ्रेन्स में रिलीजस हेड्स सब आते हैं, उन्हें भी समझाना है।

बाप समझाते हैं - बच्चे, तुमको तो देही-अभिमानी बनना है। हम आत्मा हैं, परमपिता परमात्मा से वर्सा ले रहे हैं - यह निश्चय नहीं है, कोई संशय है तो ऊंच पद पा नहीं सकेंगे। अच्छे-अच्छे बच्चे भी चलते-चलते माया का तूफान लगने से गिर पड़ते हैं। निश्चयबुद्धि से संशयबुद्धि हो पड़ते हैं। नहीं तो बच्चे कभी भी संशयबुद्धि नहीं होते हैं कि हमारा यह बाप नहीं है। यहाँ यह वन्डर है। कहते भी हैं परमपिता परमात्मा हम सब आत्माओं का बाप है, वह हमको पढ़ाते हैं फिर भी बाप को भूल जाते हैं। रोज़ समझाते रहते हैं - बच्चे, अपने बाप को याद करो तो तुम्हारे विकर्म विनाश होंगे। विकर्म तो जन्म-जन्मान्तर के सिर पर बहुत हैं। तुम जानते हो मम्मा-बाबा, जिसको ब्रह्मा-सरस्वती कहते हो, वह नम्बरवन में हैं। वह भी खुद कहते हैं - इतना योग लगाते हैं, मेहनत करते हैं तो भी अनेक जन्मों के पाप कटे नहीं हैं। कुछ न कुछ भोगना पड़ता है। अन्त में इस भोगना से छूट कर्मातीत अवस्था को पाना है। पुरुषार्थ करना है। माया भी कम रुसतम नहीं है, दोनों ही सर्वशक्तिमान हैं। रावण माया ने सब मनुष्य मात्र को पतित बना दिया है। गाते भी हैं पतित-पावन, तालियां बजाते रहते हैं, तो जरूर पतित हैं ना परन्तु अपने को समझते नहीं हैं कि हम पतित हैं। यह समझाना भी जरूरी है कि अब यह पतित दुनिया है। पावन दुनिया सतयुग को कहा जाता है। पावन दुनिया में ऐसे पतित-पावन को नहीं बुलायेंगे। वहाँ तो भारत बहुत सुखी था, एक ही धर्म था। अभी तुम जानते हो परमपिता परमात्मा ज्ञान सागर है, वह इन सब वेदों-शास्त्रों आदि के राज़ को जानते हैं। वही पढ़ा रहे हैं परन्तु कोई-कोई ऐसे हैं जो यह भी भूल जाते हैं कि हमको परमात्मा पढ़ाते हैं। बेहद का बाप हमें पढ़ाते हैं, वह नशा नहीं चढ़ता। यहाँ से बाहर घर जाने से नशा चकनाचूर हो जाता है। कोई मुश्किल हैं जो युक्तियुक्त पुरुषार्थ करते हैं। माया बड़ी जबरदस्त है। देह-अभिमान तो नम्बरवन है। बाबा ने समझाया है अपने को देही समझो। हम आत्मा हैं, इस शरीर द्वारा हम कर्म करते हैं। अपने को परमात्मा तो कभी नहीं समझना है। बाप कहते हैं मैं तुमको पतित से पावन बनाने आया हूँ। मुझे घड़ी-घड़ी याद करो। परन्तु बहुत अच्छे-अच्छे बच्चे भी बाप को याद नहीं करते हैं और फिर सच भी नहीं बतलाते हैं। चार्ट जो लिखकर भेजते हैं, उसमें भी झूठ। सच्चा चार्ट लिखते नहीं। बाबा समझाते हैं अपने को आत्मा समझो, हम आत्मा 84 जन्म पूरे कर अब बाबा के पास जाती हूँ। सवेरे उठकर बाबा को याद करो तो उसका नशा सारा दिन रहेगा। मनुष्य धन कमाते हैं तो नशा रहता है ना कि आज इतना कमाया। यह भी धन्धा है, व्यापार है तो उसमें कितनी मेहनत करनी चाहिए। बाबा अपना अनुभव बतलाते हैं, कितनी मेहनत करते हैं। सवेरे उठकर अपने से बातें करनी है। अब पार्ट पूरा हुआ, अभी हम गये कि गये, फिर 21 जन्म राज्य करना है। कितना मीठा, कितना प्यारा वन्डरफुल बाबा है। ऐसे बाप को कोई भी मनुष्य मात्र जानते नहीं हैं। बाप आकर बच्चों को अपने से भी ऊंच ले जाते हैं और बच्चे फिर बाप को सर्वव्यापी कह अपने से भी नीचे ले गये हैं इसलिए बाप कहते हैं तुम बहुत दु:खी बन पड़े हो। मैं तुम बच्चों को ब्रह्माण्ड और विश्व दोनों का मालिक बनाता हूँ और फिर तुम बच्चे मुझ बाप को सर्वव्यापी कह देते हो। यह भी ड्रामा में खेल है। अब बाप डायरेक्शन देते हैं - ऐसे-ऐसे समझाओ।

लक्ष्मी-नारायण आदि देवी-देवतायें 100 परसेन्ट सालवेन्ट बुद्धि थे, अभी नहीं हैं। फ़र्क देखो कितना है - कहाँ भारत स्वर्ग था, अभी नर्क है। यह ज्ञान कोई भी मनुष्य में नहीं है। तुम बच्चों में भी वह ताकत नहीं है। देह-अभिमान बहुत है। देही-अभिमानी को तो धारणा होनी चाहिए। बाप डायरेक्शन देते हैं - ऐसे-ऐसे ललकार करो। आत्मा क्या है, परमात्मा क्या है - कोई को पता नहीं है। तुम जानते हो हम आत्मा बिन्दी हैं, हमारा बाप परमपिता परमात्मा भी बिन्दी है। वह नॉलेजफुल, पतित-पावन है। जन्म-मरण में नहीं आते हैं। हम आत्मायें जन्म-मरण में आती हैं। परमपिता परमात्मा कहते हैं मेरा भी पार्ट है, मैं आता हूँ, तुम सबको सुखी बनाकर फिर निर्वाणधाम में बैठ जाता हूँ। मनुष्य बूढ़े होते हैं तो वानप्रस्थ में चले जाते हैं, परन्तु अर्थ नहीं समझते। वानप्रस्थ माना वाणी से परे स्थान। वह थोड़ेही वाणी से परे बैठते हैं। अभी वानप्रस्थी तो सब हैं। हम आत्मायें वाणी से परे रहने वाली हैं। परन्तु उस स्थान को भी जानते नहीं। तुम्हारे में भी कोई-कोई की बुद्धि में यह बातें हैं। देह-अभिमान बहुत है। बाप को फालो नहीं करते हैं। माया भी बहुत प्रबल है। आत्मा और परमात्मा के संबंध को कोई भी नहीं जानते हैं। बाप के संबंध को ही नहीं जानते। तुम भी घड़ी-घड़ी भूल जाते हो। बाप का बनकर बाप को पूरा याद करना चाहिए ना। कहते हैं - बाबा, घड़ी-घड़ी याद करना भूल जाता हूँ। अरे, तुम मात-पिता को याद करना भूल जाते हो! निरन्तर याद करने की ही मंजिल है, जिस मात-पिता से स्वर्ग का वर्सा ले रहे हो, तुम उनको भूल जाते हो! वन्डर है। मात-पिता तो एक ही है। बाप कहते हैं मैं ही तुम्हारा मात-पिता हूँ। यह हैं बड़ी गुह्य बातें। कई समझते हैं जगत अम्बा माता है, परन्तु नहीं वह तो साकारी है ना। तुम मात-पिता गाते हो निराकार को। यह सब बातें पहले नहीं बतलाते थे। दिन-प्रतिदिन गुह्य बातें सुनाई जाती हैं। कोई भी बात न समझा सको तो बोलो - बाबा ने अजुन सुनाया नहीं है, बाप से पूछेंगे। दिन-प्रतिदिन बहुत नई-नई प्वाइंट्स मिलती रहती हैं। नॉलेज तो बहुत बड़ी है। समझने वाले कोई समझें। पढ़ते-पढ़ते थक जाते हैं। बाबा को लिखते हैं - मैं नहीं चल सकूंगा, तंग हो गया हूँ। तंग होकर पढ़ाई को छोड़ देते हैं। विकार में जाते हैं तो पढ़ाई छूट जाती है। यह पढ़ाई ब्रह्मचर्य की धारणा से ही होगी। अगर ब्रह्मचर्य को तोड़ा तो धारणा नहीं हो सकेगी। दूसरे को कह नहीं सकेंगे कि काम महाशत्रु है। बुद्धि का ताला ही बन्द हो जाता है। मंज़िल बहुत ऊंची है।

सन्यासी तो गृहस्थ धर्म को छोड़ भाग जाते हैं। वो हैं हठयोगी सन्यासी, यह है राजयोग। बाप ही आकर राजयोग सिखलाते हैं। हठयोगी कभी राजयोग नहीं सिखला सकेंगे। यह बात पूरा समझाने का ढंग नहीं आया है। उन्हों का है हठयोग सन्यास। वह पतित को पावन बना नहीं सकते। तुम्हारा है बेहद का सन्यास, वह है हद का सन्यास। तुम्हारी बुद्धि में है कि हमारे 84 जन्म पूरे हुए, अब हम वापिस जाते हैं। यह बेहद का सन्यास बुद्धि से किया जाता है। उनका है हठयोग कर्म सन्यास। तुम्हारा है राजयोग, कर्मयोग, जो भगवान् ने सिखलाया है। अभी तुम अच्छी रीति समझा सकते हो कि वह है हठयोग और यह है राजयोग। शिव को भी कोई समझते नहीं हैं। जैसे आत्मा बिन्दी है, वैसे शिव भी बिन्दी है। बिन्दी का निशान भी भ्रकुटी में ही दिया जाता है और कोई जगह बिन्दी नहीं देंगे। भ्रकुटी में ही बिन्दी दी जाती है। आत्मा भी यहाँ ही निवास करती है - यह किसको पता नहीं है। इतनी छोटी बिन्दी में 84 जन्मों का अविनाशी पार्ट नूंधा हुआ है, यह कितनी डीप बातें हैं। कोई को समझाने नहीं आयेंगी। रीयल्टी में समझाना है। जैसे आत्मा बिन्दी है, वैसे परमात्मा भी बिन्दी है। अगर दूसरी आत्मा आयेगी तो वह भी बाजू में आकर बैठेगी ना। ब्राह्मण में आत्मा को बुलाते हैं, आत्मा आकर बोलती है - हमने फलानी जगह जन्म लिया है, तो वह आत्मा कहाँ आकर बैठेगी? क्या माथे में? उनमें अपनी भी आत्मा है ना। बाप कहते हैं मैं भी बिन्दी हूँ, मुझे परमपिता परम आत्मा कहते हैं। उनकी महिमा बड़ी भारी है। शिवाए नम: .... यह किसने महिमा की? आत्मा सालिग्राम ने, तो जरूर वह अलग है। दुनिया इन बातों को नहीं जानती, तुम जानते हो उनका एक ही नाम शिव है। ब्रह्मा, विष्णु, शंकर को ब्रह्मा देवताए नम:, विष्णु देवताए नम: कहेंगे। उनको शिव परमात्माए नम: कहेंगे। तो शिव ऊंच ठहरा ना। यह बातें तुम समझ सकते हो। यह नॉलेज भी तुमको अभी है। तुम्हारा यह हीरे जैसा जन्म है। देवतायें तो प्रालब्ध भोगते हैं। यह प्रालब्ध देने वाला बाप वन्डरफुल है। ऐसे पारलौकिक बाप का कितना रिगॉर्ड रखना चाहिए। बुद्धियोग इस ब्रह्मा में नहीं, उनमें रखना है। वह बाप पढ़ाते हैं इस द्वारा, यह शरीर लोन लिया है। सारी सृष्टि में कितना बड़ा मेहमान है। शिवबाबा परमधाम से आते हैं। कितना बड़ा भारत का मेहमान है। कहाँ से आया हुआ है? उन मिनिस्टर आदि की कितनी इज्जत होती है। यह गुप्त वेश में कितना बड़ा मेहमान पतित को पावन बनाने आया है। अच्छा!

मीठे-मीठे सिकीलधे बच्चों प्रति मात-पिता बापदादा का याद-प्यार और गुडमॉर्निंग। रूहानी बाप की रूहानी बच्चों को नमस्ते।
धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) सवेरे-सवेरे उठ याद में बैठ कमाई जमा करनी है। अपने आप से बातें करनी हैं। देही-अभिमानी रहना है।
2) राजयोग, कर्मयोग सीखना और सिखलाना है। कभी भी तंग होकर पढ़ाई नहीं छोड़नी है। बाप का रिगार्ड जरूर रखना है।
वरदान:-
महावीर बन बाप का साक्षात्कार कराने वाले वाहनधारी सो अलंकारधारी भव
महावीर अर्थात् शस्त्रधारी। शक्तियों वा पाण्डवों को सदा वाहन में दिखाते हैं और शस्त्र भी दिखाते हैं। शस्त्र अर्थात् अलंकार। वाहन है श्रेष्ठ स्थिति और अलंकार हैं सर्व शक्तियां। ऐसे वाहनधारी और अलंकारधारी ही साक्षात्कार मूर्त बन बाप का साक्षात्कार करा सकते हैं। यही महावीर बच्चों का कर्तव्य है। महावीर उसे ही कहा जाता है जो अपनी उड़ती कला द्वारा सर्व परिस्थितियों को पार कर ले।
स्लोगन:-
एकरस पुरुषार्थ द्वारा ऊंची स्थिति बना लो तो हिमालय जैसा बड़ा पेपर भी रूई हो जायेगा।
September 17, 2018

‌BK murli today 18/09/2018 (English) Brahma Kumaris Murli प्रातः मुरली Om Shanti.Shiv baba ke Mahavakya

BK Murli Today  18 September 2018 English


18/09/2018 Morning Murli Om Shanti BapDada Madhuban

Sweet children, you have accurate knowledge of the soul and the Supreme Soul. Therefore, you have to issue the challenge that you are the Shiv Shaktis.
Question:
What is the highest destination of all for which you children are making effort?
Answer:
To stay constantly in remembrance is the highest destination of all. It is only by having remembrance that your suffering of karma will be settled and you will reach your karmateet stage. Children say to the Mother and Father from whom they receive limitless happiness: Baba, we forget to remember You. This is a wonder. If you make effort continuously to remain soul conscious, you cannot forget Baba.
Song:
Who created this play and hid Himself away? 
BK Murli Today  18 September 2018 English 


Om Shanti
God speaks. You children know your Father, God. You children have now been made theists by the Father. You have come to know the Father from the Father and this is why you are called theists. You know that you really are souls and that He is the Father of you souls. Although people consider themselves to be souls, no one knows the Supreme Soul. Only when the Father Himself comes and creates children and gives them His introduction can they know Him. The Father Himself has to give His own introduction. He is the Father of all souls. He comes here face to face and says: You are souls and I am the Supreme Father of you souls. You have this faith. This is something common. There is definitely the Father of souls. It is sung that souls and the Supreme soul remained separated for a long time. Only you children know the Father. Once again, after 5000 years, the Father has come. When all the children have become atheists and sorrowful and not a single soul remains a theist, the Father comes. He makes you into theists and then hides away. Then, no one knows the Father. You children now have faith, numberwise, according to the effort you make. Although you may be sitting here personally and you do know that the Supreme Father, the Supreme Soul, the Purifier Father, is making you into pure deities from impure beings, not all of you have full faith. There are just the images of the deities here; they are not here themselves. No human beings, apart from you Brahmins, knows about the soul and the Supreme Soul. When souls say that they are the Supreme Soul, they neither know the soul nor the Supreme Soul. You children know that not a single human being considers himself to be a soul and God to be his Father accurately. However, who would issue this challenge? It was you Shaktis who issued this challenge, but you still haven't taken the power you should have taken. Shiv Shaktis are very well known. Jagadamba is also a Shakti. All the religious heads now come to conferences and you have to explain to them too. The Father explains: Children, you have to become soul conscious. You are souls and you are claiming your inheritance from the Supreme Father, the Supreme Soul. So long as you don't have this faith and have doubts, you won't be able to claim a high status. Even good children experience storms of Maya while moving along and fall. From having faithful intellects, they become those who have doubt in their intellects. Otherwise, children would never have doubt in their intellects about whether someone is their father. Here, this is a wonder. They say that the Supreme Father, the Supreme Soul, is the Father of all of us souls. He is teaching us and yet we forget the Father. He continues to explain every day: Children, remember your Father and your sins will be absolved. You have a lot of sins of many births on your heads. You know that Mama and Baba, who are called Saraswati and Brahma, are number one. They themselves say: We have so much yoga and make so much effort and yet our sins of many births have not been cut away; there is one suffering or another to be settled. At the end, you will reach your karmateet stage and become free from this suffering. You have to make effort. Maya, too, is no less powerful. Both are almighty authorities. Maya, Ravan has made all human beings impure. They sing: Oh! Purifier! They continue to clap. So they are surely impure, but they don't consider themselves to be impure. You definitely have to explain that this world is now impure. The golden age is called the pure world. You would not call out to the Purifier in this way in the pure world. There, when there was just the one religion, Bharat was very happy. You now know that the Supreme Father, the Supreme Soul, is the Ocean of Knowledge and that He knows all the secrets of the Vedas and scriptures etc. He Himself is teaching us, but some are such that they forget that the Supreme Soul is teaching them, that the unlimited Father is teaching them. That intoxication doesn't rise. When you leave here and go home, that intoxication is completely crushed. It is with difficulty that anyone makes accurate effort. Maya is very powerful. Body consciousness is number one. Baba has explained: Consider yourself to be a soul. We are souls and we act through these bodies. You must never consider yourself to be the Supreme Soul. The Father says: I have come to make you pure from impure. Repeatedly remember Me. However, many very good children don't remember the Father and they don't even tell the truth. The chart they write and send to Baba also has lies. They don't write honest charts. Baba says: Consider yourself to be a soul. We souls have completed our 84 births and are now going to Baba. Wake up early in the morning and remember Baba and that intoxication will then remain throughout the day. When people earn money, they have the intoxication of how much they earned on that day. This too is a business and so you should make so much effort in this. Baba tells you his own experience of how much effort he makes. You have to wake up early in the morning and talk to yourself: Our parts have now ended and we are about to go back and then rule the kingdom for 21 births. Baba is so sweet, so lovely and so wonderful. No human being knows such a Father. The Father comes and makes you children even higher than Himself and yet some children then say that the Father is omnipresent and bring Him down even further than themselves. This is why the Father says: You have become very unhappy. I make you children into the masters of Brahmand and the world and then you say that I, your Father, am omnipresent! This is also a play within the drama. The Father is now giving you directions on how to explain. Lakshmi and Narayan, the first deities, had one hundred percent solvent intellects, but they are not like that any more. Look how much difference there is. At first Bharat was heaven and now it is hell. No human being has this knowledge. You children do not have strength; there is a lot of body consciousness. Those who are soul conscious should have dharna. The Father gives you directions: Challenge them in this way. No one knows what a soul is or what the Supreme Soul is. You know that we souls are points and that our Father, the Supreme Father, the Supreme Soul, is also a point. He is knowledge-full and the Purifier. He doesn't enter the cycle of birth and death. We souls enter the cycle of birth and death. The Supreme Father, the Supreme Soul, says: I too have a part. I come and make all of you happy and I then go and sit in the land of nirvana. When people become old, they retire, but they don't understand the meaning of that. To retire means to go to the land beyond sound. They don't sit beyond sound. Now, all are in the stage of retirement. We souls reside beyond sound, but people don't know about that place. Among you too, only some of you have these things in your intellects. There is a lot of body consciousness. You don't follow the Father. Maya is also very powerful. No one knows about the relationship between souls and the Supreme Soul. They don't know about the relationship with the Father. You too repeatedly forget it. After belonging to the Father, you should remember Him fully. You say: Baba, I repeatedly forget to remember You. Oh really! You forget to remember the Mother and Father! The destination is to stay constantly in remembrance. You forget the Mother and Father from whom you are claiming your inheritance of heaven! It is a wonder! The Mother and Father are only the One. The Father says: I alone am your Mother and Father. These are very deep things. Some think that Jagadamba is the Mother, but no; she is a corporeal being. You used to sing to the incorporeal One: You are the Mother and Father. Baba didn't tell you all of these things in the beginning. Day by day, you are told deep things. If you are unable to explain something, then tell them: Baba hasn't yet explained these things to us, and so we will ask Him. Day by day, you receive many new points. Knowledge is vast. Those who are to understand will understand. Some become tired while studying. They write to Baba: I am unable to continue here. I am fed up! They become fed up and stop studying. When they indulge in vice, they stop studying. This study can only take place in celibacy. If you break celibacy, you aren't able to imbibe anything. You wouldn't be able to tell others that lust is the greatest enemy. The intellect becomes locked. The destination is very high. Sannyasis leave their household religion and run away. They are hatha yogi sannyasis whereas this is Raja Yoga. The Father alone comes and teaches you Raja Yoga. Hatha yogis can never teach Raja Yoga. You haven't yet learnt the art of how to explain this fully. Theirs is hatha yoga renunciation. They cannot make impure ones pure. Yours is unlimited renunciation whereas theirs is limited renunciation. It is in your intellects that your 84 births have now ended and that you are now to return home. You have this unlimited renunciation in your intellects. Theirs is hatha yoga, renunciation of karma. Yours is Raja Yoga and karma yoga which God is teaching you. You can now explain very well that that is hatha yoga and that this is Raja Yoga. No one understands about Shiva. Just as a soul is a point, so Shiva too is a point. The sign of the point is applied to the forehead. The point would not be applied anywhere else. The point (tilak) is only applied to the forehead. That is where each soul resides, but no one knows this. Such a tiny soul has an imperishable part of 84 births fixed within him. These are such deep matters. No one else would know how to explain these things. You have to explain the reality. Just as a soul is a point, so the Supreme Soul is also a point. If another soul enters a body, he would come and sit next to this one. When a departed soul is invoked into a brahmin priest, that soul comes and says: I have taken birth at such-and-such a place. So, where would that soul come and sit? Would it sit in his head? He (the brahmin) already has his own soul. The Father says: I too am a point. I am called the Supreme Father, the Supreme Soul. His praise is great. Who sang the praise: Salutations to Shiva? Souls, the saligrams. So, surely, souls are separate. The world doesn't know these things. You know that He only has the one name, Shiva. You would say to Brahma, Vishnu and Shankar: “Salutations to the deity Brahma, Salutations to the deity Vishnu”, whereas to Him you would say, “Salutations to the Supreme Soul, Shiva.” Therefore, Shiva is higher. You can understand these things. It is now that you have this knowledge. This birth of yours is as valuable as a diamond. Deities simply experience their reward. That Father, who gives you the reward, is wonderful. You should have so much regard for the Father from beyond. Your intellects’ yoga should not be connected to Brahma, but to that One. That Father is teaching you through this one. He has taken this body on loan. He is such a great Guest of the whole world. Shiv Baba comes from the supreme abode. He is such an important Guest of Bharat. Where has He come from? They honour those Ministers etc. so much. Such an important Guest has come in an incognito form to make impure ones pure. Achcha.

To the sweetest, beloved, long-lost and now-found children, love, remembrance and good morning from the Mother, the Father, BapDada. The spiritual Father says namaste to the spiritual children.
Essence for Dharna:
1. Wake up early in the morning, sit in remembrance and accumulate an income. Talk to yourself. Remain soul conscious.
2. Study and teach others Raja Yoga and karma yoga. Never become fed up and thereby stop studying. Definitely have regard for the Father.
Blessing:
May you be seated on a vehicle, holding the ornaments and grant a vision of the Father by becoming a mahavir.
A mahavir means one who hold a weapon. Shaktis and Pandavas are always shown seated on a vehicle of something and they are also shown holding a weapon. The weapon is their ornament. The vehicle is the elevated stage and the ornaments are all the powers. Only those who are seated on their vehicle and are holding their ornaments can become images that grant visions and grant a vision of the Father. This is the duty of the mahavir children. A mahavir is one who with his flying stage is able to overcome all adverse situations.
Slogan:
Make your stage elevated with your steady and constant efforts and a paper as big as the Himalayan mountains will become like cotton wool.